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प्रतिष्ठा में -- खुला पत्र 16-12-17
श्री अचल कुमार जोती जी -
मुख्य चुनाव आयुक्त ,
भारत निर्वाचन आयोग
निर्वाचन सदन -नई दिल्ली
विषय - चुनाव आयोग द्वारा बनाये गया कोड आर्डर के क्रियान्वयन हेतु
महोदय ,
आपका ध्यान संलग्न एजेंसी के द्वारा प्रसारित समाचार 'चुनाव आयोग ने बनाया कोड आर्डर 'की ओर प्राप्त हो l जिसका आयोग ने कभी खंडन नहीं किया है l EVM पर foto लगाने और चुनाव चिन्ह हटाने का निर्णय स्वागत योग्य है l आश्चर्य चकित हूँ की इसका आधा अधूरा क्रियान्वयन क्यों हुआ ? फोटो लग रही है लेकिन चुनाव चिन्ह क्यों बरक़रार है ? लोकतंत्र में जन तन्त्र की जगह दल तंत्र हावी क्यों ? क्या चुनाव आयोग द्वारा दलों को मान्यता देना जनतंत्र /लोकतंत्र की भ्रूण हत्या जैसा कृत्य नहीं है ?
सभी चुनाव की अधिसूचनाए समाचार पत्रों में प्रकाशित होती हैं TV पर प्रसारित होती हैं और यह मान लिया जाता है कि सबको अधिसूचना प्राप्त हो गयी है जबकि एक भी व्यक्ति को अधिसूचना नहीं दी जाती है l RO के आफिस के बाहर चश्पा कर दी जाती है जिसे पढ़ने के लिए जाना किला भेदना होता है गंभीरता से लिया जाय तो मिडिया लोक तन्त्र का चौथा स्तम्भ भी नहीं है और अविश्वसनीय है l विना नोटिस की सर्विस हुए चुनाव प्रक्रिया शुरू करना ही गलत है l मतदाताओं को अँधेरे में रखना l अँधा लूला लंगड़ा बूढा अनपढ़ समाचार जगत से दूर यहाँ तक हमारे जैसे high tech व्यक्ति को भी बड़ा कठिन होता है Net पर देखना l
जब भी कोई शिकायत करो तो बताया जाता है चुनाव आयोग से करो l चुनाब आयोग ढूंढे नहीं मिलता l चुनावी आचार संहिता का खुलकर उल्लंघन-RO, DM Observer सब असहाय l
अपने ही बनाये गये कोड आर्डर के सम्मान का पालन न होना कितने शर्म की बात -
कृपया चुनाव हटवाएं लोकतंत्र स्थापित कराएँ -जन प्रतिनिधित्व कानून में दल प्रतिनिधियों को वरीयता क्यों ?
भवदीय
डॉ विजय नारायण पाल
संप्रभु नागरिक
विवेक स्पर्श के साथ --संभावित प्रत्याशी 207 सिकन्दरा विधान सभा का था
डॉ विजय नारायण 'पाल '
With thanks in advance.
Your's Sciencerely
Dr. V.N. Pal
Head Department Of Maths.
U.I.E.T, Kanpur
(C.S.J.M.U Kanpur)
Mo.:-7850838083,7007967764,
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