एक दाने से सौ दाने पैदा करने वाला किसान कर्जदार कैसे हो सकता है जरा सोचो ? अव्यवस्था का शिकार / सरकार के नाम पर हो रहे व्यापार का शिकार
किसान कर्ज में कभी न था , न है , और न होगा उलटी सरकार किसानों के कर्ज में आकंठ डूबी हुई है
पूरा विश्व ही किसानों का कर्जदार है -किसान का मतलब जो पैदावारी में लिप्त हो --चाहे अन्न , जल ,फल, सब्जियां या बच्चे पैदा करे-केवल हलधर ही किसान नहीं होता है
" किसान ही भगवान है " डॉ पाल
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