Monday, 1 May 2017

पता नहीं क्यों ? मुझे संदेह होता है कि सेना के जवान पड़ोसी आतंकवादियों के शिकार हैं या अपनों के --उच्च स्तरीय न्यायिक जांच अपरिहार्य -
मै अपने अनुभव के आधार पर पूरे होश में यह सोचता रहता हूँ कि बाहरी आतंकवादी कैसे घुस आते हैं और अपना काम करके सुरक्षित वापस चले जाते हैं नहीं नहीं यह संभव नहीं है --मामला कुछ और है -
कभी सर्जिकल स्ट्रायक तो कभी नोट बंदी तो कभी कुछ और -कभी कुछ और-कभी कुछ और--------हमेशा कोई न कोई मुद्दा उछला रहता है या जानबूझ कर उछाला जाता है --------और हम सब समाचार जगत की तथाकथित सच्चाई पर वाणी युद्ध में शामिल होकर अपनी अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने में लिप्त  /तल्लीन हो जाते हैं ---वास्तविकता ओझल हो जाती हैं --अत: सावधान 

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