UPSIDC द्वारा अधिग्रहण पर समीक्षा बैठक का सार
कानपुर ०७ मई २०१७ - पूर्व निर्धारित योजनानुसार आज उन्नाव जिले में UPSIDC द्वारा २००२ में अधिग्रहित तीन गाँव की ११५२ एकड़ जमींन की समीक्षा बैठक डॉ वी. एन. पाल के संरक्षण में ८३ वर्षीय युवा श्री मोहन लाल गुप्ता की अध्यक्षता में
चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा (गंगा बैराज के पास ) पर १३ - १३ - १३ पर पीड़ित /
प्रभावित किसानों के साथ हुयी जो ३-१३-१३ से अधिक चली और आवश्यकतानुसार आने वाले प्रत्येक रविवार को भी यह बैठक डॉ वी एन पाल के समयानुसार जारी रहेगी -विशेष समीक्षा सभा २० मई को शंकरपुर सराय के रामलीला मैदान में होगी l .
आज की समीक्षा सभा में अधिग्रहण की प्रक्रिया के शुरू से लेकर अंत के सभी विन्दुओं पर क्रमबद्ध चर्चा हुयी जिसका सारांश निम्नवत है
१- अधिग्रहण तत्काल की ..धारा १७ का प्रयोग कर लोकहित में SEZ के लिए हुआ था और मुआवजा / खामियाजा / compensation 151000/= प्रति बीघा का करार सरकारी ताकत का दुरूपयोग कर परम्परागत तरीके से किसानों को विवश कर किया गया था l मुआवजा / खामियाजा / compensation को ही मूल्य / कीमत / cost है बताकर पूरे देश में किसानों की जमीन को अधिग्रहीत करने की परम्परा है मूल्य / कीमत / cost तो कभी किसानों को मिली ही नहीं l
२- UPSIDC ने अधिग्रहीत भूमि को भूमिबैक के रूप में अपने पास रखकर किसानों को तरह तरह से प्रताड़ित किया
३- तथाकथित करार के तहत भी जब .UPSIDC ने जमीन का उपपोग नहीं कर पाया .तो करार तोड़ने के कारन किसानों के आक्रोश को शांत करने के लिए जमीन का मुआवजा ५५१०००/= ...कर दिया .
४- इसके वाद भी ..UPSIDC ने अधिग्रहीत भूमि को भूमि बैक के रूप में अपने पास रखकर किसानों को तरह तरह से प्रताड़ित किया .
५-तथाकथित करार के तहत भी जब .UPSIDC ने जमीन का उपपोग नहीं कर पाया .तो करार तोड़ने के कारन किसानों के आक्रोश को शांत करने के लिए जमीन का मुआवजा १२५१०००/= ...कर दिया .
६--इस वार किसान काफी जागरूक हो गया था तो जमीन पर काम शुरू करने से पहले-- अपनी उस जमीन को २००२ से उसके नाम को सरकारी ताकत पर UPSIDC ने हथिया रखी है --हिसाब किताब करना चाहा तो मुकद्दमे लगाकर डराया धमकाया गया
७-किसानों में स्वार्थपरक पूर्ति के कारण दो भाग हो गये किसान यूनियन जिन्दावाद का नारा लगवाने व् लगाने वाले दो भागो में बट गये जिसका भरपूर फायदा UPSIDCके अधिकारीयों व् किसान हितों की लड़ाई लड़ने बालों ने खूब उठाया और उठा रहे है
८- किसान एकबार फिर ठगा सा महसूस नहीं कर रहा है ठगा गया
९-UPSIDC के इस अधिग्रहण को श्री विजय शंकर पांडे - तत्कालीन आयुक्त ने नितांत गलत ठहराया था इसे निरस्त कर किसानों की जमीनों को किसानो के नाम दर्ज करके फोन / फैक्स से जिलाधिकारी उन्नाव को आदेश किया था जिसे नजर अंदाज करके UPSIDC ने तरह तरह के बहाने बताकर किसानों की जमीने औने पौने कौड़ी के भाव लगाकर हड़प ली और ३ साल से अधिक समय का आखिरी करार भी पूरा नहीं किया
१०-सेज /SEZ योजना की गैर मोजूदगी में जमीन का अधिग्रहण , योजना पास करवा लेने के वाद भी योजना का काम शुरू नहीं हुआ समय सीमा निकल गयी
११- योजना बदल कर Trans Ganga City हो गयी विना किसी अधिसूचना के
१२-इसी बीच अधिग्रहण अधिनियम बदल गया उसके भी प्राविधान संज्ञान में नहीं लिए गये
१३ -अधिकांश किसानों को मुआवजा मिल गया कीमत नहीं एवं अन्य प्रावधान भी UPSIDC समय से पूरा नहीं कर पाया है
ऐसे में किसानों के पास सिर्फ और सिर्फ एक मात्र विकल्प बचता है की इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जाच की मांग करे l किसानों की जमीनों को उनके नाम कर नये सिरे से नई योजना के लिए अधिग्रण की प्रक्रिया अपनायी जाये l दोषियों को कानून के दायरे में लाकर दण्डित किया जाए सरकार के कोष और किसानों की क्षतिपूर्ति की भरपाई जिम्मेदार लोगों से की जाय -यह विचार डॉ वि एन पाल ने समीक्षा सभा में कही- जिसे सभी ने ध्वनमत से पारित कर दिया l डॉ पाल ने २००२ से २०१७ के बीच भूमि अधिग्रहण से पीड़ित किसानो को जो समय से पहले काल कलवित हो गये सीमा पर तैनात जवानों की भांति शहीद का दर्जा देते हुए शहीद स्मारक व् उनके परिवारों को आर्थिक मदद का भी प्रस्ताव रखा जिसे भी ध्वनमत से ---अन्य विचार् कर्ताओं में हीरेन्द्र निगम , सनोज यादव , सरस्वती डॉ पी के मिश्र आदि ने संवोधित किया l
चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा (गंगा बैराज के पास ) पर १३ - १३ - १३ पर पीड़ित /
प्रभावित किसानों के साथ हुयी जो ३-१३-१३ से अधिक चली और आवश्यकतानुसार आने वाले प्रत्येक रविवार को भी यह बैठक डॉ वी एन पाल के समयानुसार जारी रहेगी -विशेष समीक्षा सभा २० मई को शंकरपुर सराय के रामलीला मैदान में होगी l .
आज की समीक्षा सभा में अधिग्रहण की प्रक्रिया के शुरू से लेकर अंत के सभी विन्दुओं पर क्रमबद्ध चर्चा हुयी जिसका सारांश निम्नवत है
१- अधिग्रहण तत्काल की ..धारा १७ का प्रयोग कर लोकहित में SEZ के लिए हुआ था और मुआवजा / खामियाजा / compensation 151000/= प्रति बीघा का करार सरकारी ताकत का दुरूपयोग कर परम्परागत तरीके से किसानों को विवश कर किया गया था l मुआवजा / खामियाजा / compensation को ही मूल्य / कीमत / cost है बताकर पूरे देश में किसानों की जमीन को अधिग्रहीत करने की परम्परा है मूल्य / कीमत / cost तो कभी किसानों को मिली ही नहीं l
२- UPSIDC ने अधिग्रहीत भूमि को भूमिबैक के रूप में अपने पास रखकर किसानों को तरह तरह से प्रताड़ित किया
३- तथाकथित करार के तहत भी जब .UPSIDC ने जमीन का उपपोग नहीं कर पाया .तो करार तोड़ने के कारन किसानों के आक्रोश को शांत करने के लिए जमीन का मुआवजा ५५१०००/= ...कर दिया .
४- इसके वाद भी ..UPSIDC ने अधिग्रहीत भूमि को भूमि बैक के रूप में अपने पास रखकर किसानों को तरह तरह से प्रताड़ित किया .
५-तथाकथित करार के तहत भी जब .UPSIDC ने जमीन का उपपोग नहीं कर पाया .तो करार तोड़ने के कारन किसानों के आक्रोश को शांत करने के लिए जमीन का मुआवजा १२५१०००/= ...कर दिया .
६--इस वार किसान काफी जागरूक हो गया था तो जमीन पर काम शुरू करने से पहले-- अपनी उस जमीन को २००२ से उसके नाम को सरकारी ताकत पर UPSIDC ने हथिया रखी है --हिसाब किताब करना चाहा तो मुकद्दमे लगाकर डराया धमकाया गया
७-किसानों में स्वार्थपरक पूर्ति के कारण दो भाग हो गये किसान यूनियन जिन्दावाद का नारा लगवाने व् लगाने वाले दो भागो में बट गये जिसका भरपूर फायदा UPSIDCके अधिकारीयों व् किसान हितों की लड़ाई लड़ने बालों ने खूब उठाया और उठा रहे है
८- किसान एकबार फिर ठगा सा महसूस नहीं कर रहा है ठगा गया
९-UPSIDC के इस अधिग्रहण को श्री विजय शंकर पांडे - तत्कालीन आयुक्त ने नितांत गलत ठहराया था इसे निरस्त कर किसानों की जमीनों को किसानो के नाम दर्ज करके फोन / फैक्स से जिलाधिकारी उन्नाव को आदेश किया था जिसे नजर अंदाज करके UPSIDC ने तरह तरह के बहाने बताकर किसानों की जमीने औने पौने कौड़ी के भाव लगाकर हड़प ली और ३ साल से अधिक समय का आखिरी करार भी पूरा नहीं किया
१०-सेज /SEZ योजना की गैर मोजूदगी में जमीन का अधिग्रहण , योजना पास करवा लेने के वाद भी योजना का काम शुरू नहीं हुआ समय सीमा निकल गयी
११- योजना बदल कर Trans Ganga City हो गयी विना किसी अधिसूचना के
१२-इसी बीच अधिग्रहण अधिनियम बदल गया उसके भी प्राविधान संज्ञान में नहीं लिए गये
१३ -अधिकांश किसानों को मुआवजा मिल गया कीमत नहीं एवं अन्य प्रावधान भी UPSIDC समय से पूरा नहीं कर पाया है
ऐसे में किसानों के पास सिर्फ और सिर्फ एक मात्र विकल्प बचता है की इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जाच की मांग करे l किसानों की जमीनों को उनके नाम कर नये सिरे से नई योजना के लिए अधिग्रण की प्रक्रिया अपनायी जाये l दोषियों को कानून के दायरे में लाकर दण्डित किया जाए सरकार के कोष और किसानों की क्षतिपूर्ति की भरपाई जिम्मेदार लोगों से की जाय -यह विचार डॉ वि एन पाल ने समीक्षा सभा में कही- जिसे सभी ने ध्वनमत से पारित कर दिया l डॉ पाल ने २००२ से २०१७ के बीच भूमि अधिग्रहण से पीड़ित किसानो को जो समय से पहले काल कलवित हो गये सीमा पर तैनात जवानों की भांति शहीद का दर्जा देते हुए शहीद स्मारक व् उनके परिवारों को आर्थिक मदद का भी प्रस्ताव रखा जिसे भी ध्वनमत से ---अन्य विचार् कर्ताओं में हीरेन्द्र निगम , सनोज यादव , सरस्वती डॉ पी के मिश्र आदि ने संवोधित किया l
किसानों के मसीहा चौधरी चरण सिंह की प्रतिमा के नीचे गंगा वेराज पर गंगा जल लेकर गंगा की कसम खायी संकल्प लिया कि जब तक न्याय नहीं मिल जाता हमारा यह शांति पूर्ण संघर्ष /आन्दोलन /अभियान जारी रहेगा
इस अवसर पर निम्न किसान एवं किसान हितैसी मौजूद रहेl सभी सामाजिक संगठनों से , किसान के बेटों से जिन्हें किसान हितों की रक्षा के लिए जिम्मेदारी सोंपी गयी या अवसर प्राप्त हुआ है सरकार के बाहर / सरकार में शामिल लोगों से सभी से अपील है की वे अपनी अपनी अहम भूमिका निभाएं l मरते हुए किसान को बचाएं l अन्यथा इतिहास हमे माफ़ नहीं करेगा
1 रामू २ प्रकाश ३ प्रताब ४ नन्द किशोर ५ बालक ६ पप्पू ७ सनोज ८ हीरेन्द्र निगम ९ किशोरी लाल १० पृथ्वी पाल ११ कुलदीप १२ बहादुर १३ हरिशंकर १४ मटरू १५ अमरीतलाल १६ रमेश १७ कुवारे १८ राम सिंह १९ सुनीत सेठ २० सखतु २१ नान्हे
२२ अग्गा २३ पप्पू २४ नीरज २५ केशन २६ रज्जन २७ सीताराम २८ धर्मेन्द्र २९ रामू डॉक्टर३० टीकाराम ३१ -सनोज यादव ,आनंद द्विवेदी ,मोहन लाल गुप्ता , सरस्वती , डॉ प्रभाकांत मिश्र , डॉ वी एन पाल आदि सैकड़ों जन मौजूद थे श्री रामेन्द्र कटियार एडवोकेट पूर्व अध्यक्ष कानपुर बार असोसिएशन ने दूरभाष पर दूरभाष पर समीक्षा सभा को अपना समर्थन दिया श्री अजय अनमोल को भी आमंत्रित किया गया था उनकी अनुपस्थिति तमाम सवालिया निशान छोड़ गयी l
२२ अग्गा २३ पप्पू २४ नीरज २५ केशन २६ रज्जन २७ सीताराम २८ धर्मेन्द्र २९ रामू डॉक्टर३० टीकाराम ३१ -सनोज यादव ,आनंद द्विवेदी ,मोहन लाल गुप्ता , सरस्वती , डॉ प्रभाकांत मिश्र , डॉ वी एन पाल आदि सैकड़ों जन मौजूद थे श्री रामेन्द्र कटियार एडवोकेट पूर्व अध्यक्ष कानपुर बार असोसिएशन ने दूरभाष पर दूरभाष पर समीक्षा सभा को अपना समर्थन दिया श्री अजय अनमोल को भी आमंत्रित किया गया था उनकी अनुपस्थिति तमाम सवालिया निशान छोड़ गयी l
अंत में ८३-८४ वर्षीय वयोयुवक श्री मोहन लाल गुप्ता सुभाष उपवन के संरक्षक ,नेता जी सुभाष चन्द्र बोस के दीवाने ने हर तरह से चाहे लम्बा उपवास हो अनशन हो या जेल जाना हो खून देना हो अपने समर्थकों के साथ किसानो की सच्ची सरल मांग / जुनूनी मांग-- पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय न्यायिक जाच --का समर्थन करते हुए अपनी भूमिका बताई लोगों का मनोबल बढ़ाया l सामाजिक कार्यकत्री सरस्वती ने धन्यवाद ज्ञापित किया
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