Thursday, 9 March 2017
Monday, 6 March 2017
प्रतिष्ठा में -राष्ट्रपति जी ,
भारत सरकार /संघ सरकार
राष्ट्रपति भवन -नई दिल्ली
महामहिम राष्ट्रपति जी , विजय हो आपकी --विवेक स्पर्श
आपका ध्यान प्राप्त हो कि आप हमारे राष्ट्र के सर्वे सर्वा संवैधानिक प्रमुख हैं राष्ट्रपति जी संवैधानिक सरकारों के गठन हेतु ध्यानाकर्षण करते हुए संलग्न ईमेल २३-०५-१६ से अपेक्षा की गयी थी कि आप अपने विवेकाधिकार / विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए अपने अधीनस्थ राज्यपालों को निर्देशित एवं आदेशित करेगे कि संवैधानिक सरकारो का गठन होना चाहिए ना कि परम्परागत| उसके लिए बिन्दुवार कदम उठाने के संकेत दिए गए थे आपने हमारे सुझाव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दीऔर ना ही पत्र को संज्ञान में लिया गया मै इसे मौन स्वीकृति मानता हू अभी हाल में 5 राज्यों में हो रहे औपचारिक चुनावों के बाद असंवैधानिक / परम्परागत / काल्पनिक सरकारों के गठन की प्रक्रिया अपनाई जाने वाली है जिसे रोकना आपकी संवैधानिक / वास्तविक / स्वाभाविक जिम्मेदारी भी है l आप अपने विवेकाधिकार जो आपका विशेषाधिकार है का प्रयोग करते हुए सच्ची संवैधानिक - दलीय पहचान वाली सरकारों के बजाय - लोकतान्त्रिक बहुमत या सर्व सम्मत की सरकारों के गठन में अहं भूमिका निभाएं अन्यथा इतिहास आपको माफ़ नहीं करेगा --आप अपने अधीन कार्यरत सभी राज्यपालों को निर्देशित / आदेशित करें कि मुझे संवैधानिक सरकारों का गठन करके दो - परम्परागत असंवैधानिक सरकारों के गठन की short cut प्रक्रिया नहीं चलेगी .
सादर
भवदीय
भारत सरकार /संघ सरकार
राष्ट्रपति भवन -नई दिल्ली
महामहिम राष्ट्रपति जी ,
आपका ध्यान प्राप्त हो कि आप हमारे राष्ट्र के सर्वे सर्वा संवैधानिक प्रमुख हैं राष्ट्रपति जी संवैधानिक सरकारों के गठन हेतु ध्यानाकर्षण करते हुए संलग्न ईमेल २३-०५-१६ से अपेक्षा की गयी थी कि आप अपने विवेकाधिकार / विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए अपने अधीनस्थ राज्यपालों को निर्देशित एवं आदेशित करेगे कि संवैधानिक सरकारो का गठन होना चाहिए ना कि परम्परागत| उसके लिए बिन्दुवार कदम उठाने के संकेत दिए गए थे आपने हमारे सुझाव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दीऔर ना ही पत्र को संज्ञान में लिया गया मै इसे मौन स्वीकृति मानता हू अभी हाल में 5 राज्यों में हो रहे औपचारिक चुनावों के बाद असंवैधानिक / परम्परागत / काल्पनिक सरकारों के गठन की प्रक्रिया अपनाई जाने वाली है जिसे रोकना आपकी संवैधानिक / वास्तविक / स्वाभाविक जिम्मेदारी भी है l आप अपने विवेकाधिकार जो आपका विशेषाधिकार है का प्रयोग करते हुए सच्ची संवैधानिक - दलीय पहचान वाली सरकारों के बजाय - लोकतान्त्रिक बहुमत या सर्व सम्मत की सरकारों के गठन में अहं भूमिका निभाएं अन्यथा इतिहास आपको माफ़ नहीं करेगा --आप अपने अधीन कार्यरत सभी राज्यपालों को निर्देशित / आदेशित करें कि मुझे संवैधानिक सरकारों का गठन करके दो - परम्परागत असंवैधानिक सरकारों के गठन की short cut प्रक्रिया नहीं चलेगी .
मान्यवर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा की संवैधानिक पदों पर बैठे हुए / नियुक्ति किये गए व्यक्ति परोक्ष / अपरोक्ष रूप में आपके प्रतिनिधि है और ये सभी प्रतिनिधि स्वार्थ परक सत्ता संग्राम में फस कर आपस में एक दुसरे की निम्न / घटिया स्तर की आलोचना कर रहे है , संप्रभु गणराज्य भारत के साधारण नागरिक होने के नाते जब कोई देश के प्रधानमंत्री को, प्रदेशो के मुख्यमंत्रीयो को अभद्र टिप्पड़ी करता है और राष्ट्रपति और राज्यपालों की मौन स्तिथि देखता हू तो बड़ा आश्चर्य होता है प्रधानमंत्री जी उत्तरप्रदेश की तमाम चुनावी रैलियों में वोटो को खातिर हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री को आड़े हाथो लेते रहे है बड़ा अशोभनीय लगा और हमारे मुख्यमंत्री एवं अन्यो ने भी हमारे प्रधानमंत्री को खरी खोटी सुनाई और आम नागरिको को दिग्भ्रमित किया | प्रधानमंत्री जी ये भूल गए कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति उनके सुझाव पर आपके द्वारा नियुक्त किये गए राज्यपाल ने की है | प्रदेश की सरकार का मुखिया राज्यपाल होता है मुख्यमंत्री नहीं | यदि प्रधानमंत्री की द्रष्टि में राज्य के हालत ठीक नहीं है तो वे आपके मध्यम से राज्यपाल को बुला सकते है सार्वजानिक रूप से एक सरकार दूसरी सरकार की आलोचना करे ये समझ के परे है प्रदेशो के मुख्यमंत्री खुले आम प्रधानमंत्री की सव्जनिक आलोचना करे ये भी समझ के परे है आपके द्वारा संज्ञान में ना लिए जाना भी समझ के परे है अगर देश और प्रदेश के मुखिया /उच्च पदासीन सत्तानसीनो के ब्यान सही है तो दोनों तत्काल प्रभाव से बर्खास्त होने चाहिए | दल प्रतिनिधियों, मंत्रियो, मुख्यमंत्रीयो एवं प्रधानमंत्री की कार्यशैली उनके दलो तक ही सीमित है जबकि वे पूरे निर्वाचन क्षेत्रो के, पुरे प्रदेश के व् पुरे देश के प्रतिनिधि है अपनी अपनी दल वोशेष के नहीं ये एक गंभीर स्थिथि है इस पर सम्वैधनिक कार्यवाही अपेक्षित है परम्परागत तरीके से मूक दर्शक बने रहना और अपने विवेकाधिकार जो आपका विशेषाधिकार है का प्रयोग ना करना समझ के परे है |
सबकी सरकार का गठन हो यही हमारा भाव सादर
भवदीय
डॉ विजय नारायण पाल
विभागाध्यक्ष -गणित
सी एस जे एम् वि वि कानपुर
०५१२२७७००६६,०८७६५३८१६१४ ,०८७६५०७१८७१,०९३०५५७४६१०
Saturday, 4 March 2017
Note के बदले रुपया यानि चांदी का सिक्का banks/RBI से ले लेना चाहिए क्योंकि banks/RBIअविश्वसनीय हो गयीं हैं सबकी गरीबी दूर हो जाएगी चांदी के सिक्के को सुनार के यहाँ चांदी के भाव बेचकर नोट लीजिये फिर नोट के् बदले रुपया यानि चांदी के सिक्के banks/RBI से ले जिन्हें सुनार के यहाँ चांदी के भाव बेचकर नोट लीजिये इस प्रक्रिया को बार बार दुहरायें सबकी गरीबी दूर हो जाएगी-
Friday, 3 March 2017
--Notice to all Concerned--
All of you are cordially invited to attend the Upcoming Youth Workshop & Conference dated 26 - 28 March at Kanpur.and extend the suggestions / render the help to make the Event a great success- Dr V N Pal
Main Features / Draft demands or proposals of the Upcoming Youth Workshop & Conference
1) Declassify and disclose Transfer of Power agreement immediately.
2) Recognise Azad Hind Government as first independent government of Bangladesh, Bharat & Pakistan.
3) Remove external emergency.
4) Repel war criminal tag from Netaji Subhas Chandra Bose and Rash Behari Bose.
5) Disclose all files related to all the freedom fighters including Netaji & Shaheed-e-Azam untampered.
6) Come out from Commonwealth & dissolve it.
7) Return all the properties looted by the East India Company & British Imperialism after Palashy battle 1757 & Kohinoor diamond, peacock throne,etc.
8) All the British authorities including the queen, should apologize unconditionally for all the atrocities committed by them upon the people of Hindustan.
9) Victimised by partition, willing Benglee & Punjabi citizens should be provided dual citizenship in Bharat & Bangladesh and in Bharat & Pakistan.
10) Need to create a federation between Bangladesh,Bharat and Pakistan to rectify the problems faced after illegally partitioning the entire country.
11) SAARC should be strengthened and interest of the common people should be given top priority.
12) Review all the diplomatic ties with the capitalist and fundamentalist countries.
13) Break all the ties with World Bank, IMF and WTO.
14) Bring back all the money, saved in foreign banks. Disclose the names of the account holders. Disclose the names of the defaulters.
Return the wealth of Azad Hind Bank & its account.
Return the wealth of Azad Hind Bank & its account.
15) Replace the colonial & religious education system with a secular, rational, scientific, value based & nature-human centric one.
16) Search & research commission must be formed to assess the true freedom fighter and to be reinstated them in the teal history of freedom struggle.
17) History needs to be re-written . Colonial history should be discontinued.
18) All the traitors, agents of foreign countries or companies, corrupt people should be punished irrespective of caste,religion or post.
19) Blue films, gambling, prostitution should be banned. Drugs , alcohol needs to be controlled.
20) No oppression in the name of good governance like AFSPA, UAPA,sedition act,etc should be tolerated.
21) Genetically modified crops should be banned completely. AKI treaty should be scrapped.
22) No privatisation of life insurance,banks,rail,defence should be tolerated. Protection of native people, fishermen , village people should be ensured.
23) Any bill or law those which are against the interests of workers,peasants,farmers should be scrapped. Like the MPs and Judges the workers should be allowed to declare their salaries.
24) Self-Determination of all the tribes should be accepted.
25) Scrap Reserve Bank of India Act 1934.
26) The post of Governor should be abolished.
27) Earning and profit should be controlled. Necessary items should be provided free of cost to the people. Corrupt and rich people should not be allowed to stand as a candidate.
28) Everybody should respect the diversity,secularist and socialist structure and culture of this land.
29) Military and paramilitary forces should not be used against the citizens. Pensions, promotions, salaries and other facilities of the soldiers should be transparent. Stop the corruption during recruitment . All the forces need to be organised.
30) All Power to be given to the hands of the People.
(To be edited)
(To be edited)
Thursday, 2 March 2017
नोट में और चेक में क्या फर्क है ?
नोट पर गवर्नर(जारीकर्ता) के हस्ताक्षर होते है, और चेक पर धारक/जारीकर्ता के हस्ताक्षर होते हैं l
यदि चेक bounce हो जाती है तो जारीकर्ता को सजा का प्रावधान है, और यदि कोई नोट को लेने से मना कर दे तो मना करने तो वाले(banks) को अविश्वसनीय और जारीकर्ता को सजा मिलनी चाहिए l
नोट जारी करने वाले गवर्नर को बिना शर्त लिखित टिप्पणी/ वादा के अनुसार नोट के बदले रुपया (चांदी का सिक्का) RBI / Banks के माध्यम से देना होगा l
लिखित टिप्पणी / वादा का मतलब केवल कटे - फटे सड़े गले / प्रचलन से बाहर या नोटबंदी के शिकार नोटों को बदलना नहीं है , बल्कि धारक की इच्छानुसार रुपयों की मांग पूरी करनी है l
मना करने पर "केंद्र सरकार द्वारा प्रत्याभूत" के अनुसार banks में जमाधन के लिए केंद्र सरकार की मदद से अदाएगी सुनिश्चित है l लेकिन अगर केंद्र सरकार पीछे हटती है मदद नही करती है तो उस पर भी आम जनता का विश्वास ख़तम हो जाना चहिये l वैसे भी केंद्र सरकार का भारतीय संविधान में कोई जिक्र नही है ;इस तरह से सभी नोटों पर सवालिया निशान खड़ा हो जाता है l
1.मेरे पास एक रुपया है कागज का जिस पर भारत सरकार लिखा है l वित्त सचिव के हस्ताक्षर है गवर्नेर के नहीं l ऐसा लगता है की RBI केंद्र सरकार के अधीन है भारत सरकार के नही हैl2.मेरे पास एक रुपया है धातु का जिस पर भारत लिखा है l सरकार गायब है l
3.मेरे पास एक रुपये जो कागज/धातु के हैं के अलावा अन्य Denomination के सभी प्रकार के नोट्स भी हैं जिस पर भारत सरकार गायब है भारतीय रिजर्व बैंक लिखा है, जिनका वित्तमंत्रालय से कोई सम्बन्ध नही है l सोने - चांदी के सिक्कों के बदले नोट्स छापे(जारी किये) गये थे और उन पर Promise-nary Note अंकित किया गया था l
4. सुनार की विश्वसनीयता की तर्ज पर बैंको का प्रादुर्भाव हुआ और किसी भी क्षण Promise-nary Note धारक को इस बात की गारंटी थी की ओ कभी भी सोने चांदी के सिक्के ले सकते हैं l कालांतर में विश्वसनीयता बढती गयी Promise-nary Note प्रचलन में आ गये सोने - चांदी के सिक्कों को भूल गये l
हाल की घटनाओं (नोट - बंदी) को लेकर असुबिधापुर्वक क्रियान्वयन से / मनाही से / तरह तरह के स्पष्टीकरण / शर्तों से RBI और Banks की विश्वसनीयता समाप्त हो गयी है l भविष्य में सोने - चांदी के सिक्कों तरह से Promise-nary Note / Cheques / DD / Digital Money भी गायब होना स्वाभाविक है l Digital Record तो कभी भी Hack / ध्वस्त हो सकता है अतः निम्न सुझाव के साथ सावधान !
Note के बदले रुपया यानि चांदी का सिक्का banks/RBI से ले लेना चाहिए क्योंकि banks/RBIअविश्वसनीय हो गयीं हैं सबकी गरीबी दूर हो जाएगी चांदी के सिक्के को सुनार के यहाँ चांदी के भाव बेचकर नोट लीजिये फिर नोट के् बदले रुपया यानि चांदी के सिक्के banks/RBI से ले जिन्हें सुनार के यहाँ चांदी के भाव बेचकर नोट लीजिये इस प्रक्रिया को बार बार दुहरायें सबकी गरीबी दूर हो जाएगी-
Sunday, 19 February 2017
डॉ वी एन पाल के अनुसार ----
मानवता के दुश्मन चार -
नेता अफसर धर्माचार,औपत्रकार/अख़बार
मीडिया जगत - l
मानवता के चार रक्षक,
किसान , सैनिक , वैज्ञानिक औ शिक्षक l
मानवता के दुश्मन चार -
नेता अफसर धर्माचार,औपत्रकार/अख़बार
मीडिया जगत - l
मानवता के चार रक्षक,
किसान , सैनिक , वैज्ञानिक औ शिक्षक l
डॉ पाल बहुत पहले से कहते आयें है की मीडिया जो लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ माना जाता है लेकिन है नही इसे संबैधानिक दर्जा दिया जाना चाहिए क्योंकि इसने दुनिया के लोंगो को तबाह कर दिया है हर चीज के मायने बदलने में लिप्त है l खुशी है कि अमेरिका के राष्ट्रपति " डोनाल्ड ट्रम्प" ने कहा है कि मीडिया अमेरिकी लोंगो का दुश्मन है l एक छोटी सी स्वीकारोक्ति है, मीडिया तो पूरी दुनिया के लोंगो का दोस्ताना दुश्मन बना हुआ हैl
Subscribe to:
Posts (Atom)
राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया पर सवालिया निशान?
Public Interest Litigation जनहित याचिका 18 अगस्त 2022 भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश के सम्मुख जनहित याचिका हेतु ...
-
Public Interest Litigation जनहित याचिका 18 अगस्त 2022 भारत के माननीय मुख्य न्यायाधीश के सम्मुख जनहित याचिका हेतु ...
-
https://twitter.com/palvn/status/1522618942111461377?t=8RH2iNaWqvLRW4Ndb-ytLA&s=19












