Monday, 6 March 2017

प्रतिष्ठा में -राष्ट्रपति जी ,
                 भारत सरकार /संघ सरकार 
                  राष्ट्रपति भवन -नई दिल्ली 

महामहिम राष्ट्रपति जी ,   
                                  विजय हो आपकी --विवेक स्पर्श 
                 
                            आपका ध्यान प्राप्त हो कि आप हमारे राष्ट्र के सर्वे सर्वा संवैधानिक प्रमुख हैं राष्ट्रपति जी 
संवैधानिक सरकारों के  गठन हेतु ध्यानाकर्षण करते हुए संलग्न ईमेल २३-०५-१६ से अपेक्षा की गयी थी कि आप अपने   विवेकाधिकार /  विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए अपने अधीनस्थ राज्यपालों को निर्देशित एवं आदेशित करेगे  कि संवैधानिक सरकारो का गठन होना चाहिए ना कि परम्परागत| उसके लिए बिन्दुवार  कदम उठाने के संकेत दिए गए थे आपने हमारे सुझाव पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दीऔर ना ही पत्र को संज्ञान में लिया गया मै इसे मौन स्वीकृति मानता हू अभी हाल में 5 राज्यों में हो रहे औपचारिक चुनावों के बाद असंवैधानिक / परम्परागत / काल्पनिक सरकारों के  गठन की प्रक्रिया अपनाई जाने वाली है जिसे रोकना आपकी संवैधानिक / वास्तविक / स्वाभाविक  जिम्मेदारी भी है l आप अपने विवेकाधिकार जो आपका विशेषाधिकार है का प्रयोग करते हुए  सच्ची संवैधानिक - दलीय पहचान वाली सरकारों के बजाय - लोकतान्त्रिक बहुमत या सर्व सम्मत की सरकारों   के  गठन में अहं भूमिका निभाएं अन्यथा इतिहास आपको माफ़ नहीं करेगा --आप अपने अधीन कार्यरत सभी राज्यपालों को निर्देशित / आदेशित करें कि मुझे संवैधानिक  सरकारों का गठन करके दो - परम्परागत असंवैधानिक सरकारों के  गठन की short cut प्रक्रिया नहीं चलेगी .
                  मान्यवर आपका ध्यान आकर्षित करना चाहूंगा की संवैधानिक पदों पर बैठे हुए / नियुक्ति किये गए व्यक्ति  परोक्ष / अपरोक्ष रूप में  आपके प्रतिनिधि है और ये सभी प्रतिनिधि स्वार्थ परक  सत्ता संग्राम में फस कर आपस में एक दुसरे की निम्न / घटिया स्तर की  आलोचना कर रहे है , संप्रभु गणराज्य भारत के साधारण नागरिक होने के नाते जब कोई देश के प्रधानमंत्री को, प्रदेशो के मुख्यमंत्रीयो को अभद्र टिप्पड़ी करता है और राष्ट्रपति और राज्यपालों की मौन स्तिथि देखता हू तो बड़ा आश्चर्य होता है प्रधानमंत्री जी उत्तरप्रदेश की तमाम चुनावी रैलियों में वोटो को खातिर हमारे प्रदेश के मुख्यमंत्री को आड़े हाथो लेते रहे है बड़ा अशोभनीय लगा और हमारे मुख्यमंत्री एवं अन्यो ने भी हमारे प्रधानमंत्री को खरी खोटी सुनाई और आम नागरिको को दिग्भ्रमित  किया | प्रधानमंत्री जी ये भूल गए कि मुख्यमंत्री की नियुक्ति उनके सुझाव पर आपके द्वारा नियुक्त किये गए राज्यपाल ने की है | प्रदेश की सरकार का मुखिया राज्यपाल होता है मुख्यमंत्री नहीं | यदि प्रधानमंत्री की द्रष्टि में राज्य के हालत ठीक नहीं है तो वे आपके मध्यम से राज्यपाल को बुला सकते है सार्वजानिक रूप से एक सरकार दूसरी सरकार की आलोचना करे ये समझ के परे है प्रदेशो के मुख्यमंत्री खुले आम प्रधानमंत्री की सव्जनिक आलोचना करे ये भी समझ के परे है आपके द्वारा संज्ञान में ना लिए जाना भी समझ के परे है अगर देश और प्रदेश के मुखिया /उच्च पदासीन सत्तानसीनो के ब्यान सही है तो दोनों तत्काल प्रभाव से बर्खास्त होने चाहिए | दल प्रतिनिधियों, मंत्रियो, मुख्यमंत्रीयो एवं प्रधानमंत्री की कार्यशैली उनके दलो तक ही सीमित है जबकि वे पूरे निर्वाचन क्षेत्रो के, पुरे प्रदेश के व् पुरे देश  के प्रतिनिधि है    अपनी अपनी दल वोशेष के नहीं ये एक गंभीर स्थिथि है इस पर सम्वैधनिक कार्यवाही अपेक्षित है परम्परागत तरीके से मूक दर्शक बने रहना और अपने विवेकाधिकार जो आपका विशेषाधिकार है का प्रयोग ना करना   समझ  के परे है |                                                                                                                                                               
सबकी सरकार का गठन हो यही हमारा भाव  
                   सादर 


भवदीय 

डॉ  विजय नारायण पाल 
 विभागाध्यक्ष -गणित 
सी एस जे एम् वि वि कानपुर 
०५१२२७७००६६,०८७६५३८१६१४  ,०८७६५०७१८७१,०९३०५५७४६१०

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