Sunday, 12 March 2017


http://www.rashtriyasahara.com/epapermain.aspx?queryed=12‘‘यूआईईटी’ को 17 साल बाद भी नहीं मिली स्वायत्तता
तीन साल पूर्व गठित हुआ बीओजी, पर नहीं हुई एक भी बैठक
विवि प्रोफेसर ने राज्यपाल से लगायी आदेशों पर अमल की गुहारकतिपत अधिकारियों पर विवि परिवार के लोगों के उत्पीड़न का आरोप
सीएसजेएमयू में संचालित यूनिवर्सिटी इंस्टीटय़ूट आफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नालॉजी (यूआईईटी, पूर्व नाम आईईटी) को राजभवन के संबंधित आदेश के 17 साल बाद भी वास्तविक ‘‘स्वायत्तता’ नहीं मिल सकी है। संस्थान को अपने संसाधनों के उपयोग तक के लिए विवि प्रशासन की अनुमति पर निर्भर रहना होता है। इससे संस्थान की शैक्षिक गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार के कार्य भी उपेक्षित चल रहा है। विवि के जिम्मेदारों की कोशिश इस संस्थान को ‘‘स्वायत्त’ न कर इस पर अपना वर्चस्व बनाये रखने की है।यूआईईटी के प्रोफसर व गणित विभाग के हेड डॉ.वीएन पाल ने यूआईईटी के ‘‘स्वायत्तता’ के मुद््दे को फाइलों में कैद कर दिये जाने पर चिंता जताते हुए प्रदेश के राज्यपाल व विवि कुलाधिपति राम नाईक से मुलाकात की। उन्होंने राज्यपाल से राजभवन से जारी आदेश को सीएसजेएमयू द्वारा सम्मान न किये जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्यपाल के समक्ष विवि की कार्यशैली पर उंगली उठाते हुए शिकायत की कि विवि के कतिपय अधिकारी राजभवन व शासकीय आदेशों का सम्मान न कर विवि परिवार को लोगों का मानसिक-आर्थिक उत्पीड़न करते हैं। उन्होंने राज्यपाल से राजभवन से जारी आदेश को सम्मान सुनिश्चित कराने व विवि के लोगों को यंतण्रा से मुक्ति दिलाने की मांग की। उन्होंने पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच करा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई किये जाने की बात भी कही है।प्रो.पाल के मुताबिक विवि में आईईटी की स्थापना के बाद इस संस्थान को ‘‘स्वायत्तता’ प्रदान करने के प्रस्ताव को राजभवन द्वारा अनुमोदित किया गया व इस संबंध में आदेश जारी किये गये। उक्त आदेश के 17 साल बाद भी संस्थान को ‘‘स्वायत्तता’ नहीं प्रदान की जा सकी है। उनका कहना है कि उनके प्रयास पर विवि के पूर्व कुलपति प्रो.अशोक कुमार ने इस प्रकरण को महत्ता देते हुए संस्थान के लिए बोर्ड ऑफ गर्वनर (बीओजी) का गठन किया। बीओजी की गठन तो किया गया, लेकिन तीन साल में इसकी एक भी बैठक नहीं हुई। इस कारण ‘‘स्वायत्तता’ का मामला अभी भी ‘‘फाइलों’ में कैद है।विवि प्रोफेसर की शिकायत है कि विवि के कतिपय अधिकाररी राजभवन, शासव व खुद विवि तक के आदेशों का सम्मान नहीं करते। विभिन्न प्रकरणों को लंबित कर तरह-तरह से विवि परिवार को लोगों का उत्पीड़न करते हैं। उन्होंने राज्यपाल से राजभवन से जारी आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित कराये जाने की अपेक्षा की है।

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